10 साल में डुबाए 1.57 लाख करोड़ रुपये, टाटा समूह को सौंपे जाने तक सरकार को खर्च करनी होगी मोटी रकम

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एयर इंडिया की कमान टाटा समूह को सौंपने के बाद भी सरकार का हिस्सा बहुत बड़ा रहेगा। इसका भुगतान भी करदाता के कैश से ही करना होगा। ऋण और बकाया राशि 2009-10 के बाद से एयर इंडिया पर खर्च की गई सबसे महत्वपूर्ण राशि है।

भारी घाटे और कर्ज में डूबी देश की इकलौती सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया को लंबी लड़ाई के बाद खरीदार मिल गया है, लेकिन पिछले 10 साल में इस एयरलाइन ने 1,57,339 करोड़ रुपये करदाताओं को उड़ा दिया है। दिसंबर में जब तक कंपनी की कमान टाटा समूह को सौंपी जाती है, तब तक सरकार को इसके पीछे बड़ी रकम खर्च करनी होगी।

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि सरकार को अब तक एयरलाइंस चलाने के लिए बड़ी रकम खर्च करनी पड़ी है। टाटा समूह को इसकी कमान सौंपने के बाद भी सरकार के हिस्से की बड़ी कानूनी जिम्मेदारी बनी रहेगी। इसका भुगतान भी करदाता के कैश से ही करना होगा। ऋण और बकाया राशि 2009-10 के बाद से एयर इंडिया पर खर्च की गई सबसे महत्वपूर्ण राशि है। सरकार ने 2019 में स्पेशल फंक्शन कार (एसपीवी) के तहत नई कंपनी एयर इंडिया एसेट होल्डिंग रिस्ट्रिक्टेड (एआईएएचएल) का गठन कर 29,464 करोड़ रुपये इसमें डाले थे। यानी कंपनी के ग्राहक को यह कर्ज नहीं चुकाना होगा, लेकिन सरकार इसे चुका सकती है।

अधिकारियों के पास 14,718 करोड़ रुपये की संपत्ति हो सकती है

विनिवेश की प्रक्रिया पूरी होने के बाद एयर इंडिया की गैर-प्रमुख संपत्ति सरकार के पास रह जाएगी। यह भूमि, भवन, कार्य, मोटल, आदि के साथ आएगा। विश्लेषकों का अनुमान है कि इस संपत्ति की कुल कीमत 14,718 करोड़ रुपये है। इस पर भूमि की अनुमानित कीमत 7-8 हजार करोड़ रुपये, भवनों की कीमत 3-4 हजार करोड़ रुपये, कार्य व अन्य सामान की कीमत 2,000 करोड़ रुपये होगी। हालांकि इस कीमत पर खरीदार मिलना मुश्किल होगा। इसके अलावा एयर इंडिया की चार अनुषंगियों की जिम्मेदारी भी सरकार की होगी, जिसकी कीमत करीब 1,000 करोड़ रुपए होगी। इसलिए, इन संपत्तियों के लिए भी प्रभावी ढंग से उपभोक्ताओं की तलाश करना मुश्किल होगा।

जहां नकद जाएगा

मौजूदा कर्ज 46,262 करोड़
वेंडर का बकाया 15,834 करोड़
सितंबर-दिसंबर घाटा 2,661 करोड़
अधिकारियों ने पूंजी निवेश किया 1.10 लाख करोड़
टाटा से मिलेंगे 2,700 करोड़
14,718 करोड़ की शेष संपत्ति
पूरी पूंजी खर्च 1,57,339 करोड़

existing debt 46,262 crore
vendor dues 15,834 crore
September-December deficit 2,661 crore
Government invested capital 1.10 lakh crore
will meet Tata 2,700 crore
remaining asset value 14,718 crore
total capital spent 1,57,339 crore

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